खुद-ब-खुद आ जाएँगी जिंदगी मे भी खुशियाँ-एक कविता

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खुद-ब-खुद सिमट जाएँगी
न गई है जो दूरियाँ अपनो से
तुम बस इन कदमो को
सुलह की राह पर चलाए रखना

खुद-ब-खुद मान जाएगी
गर रूठ गई है जिंदगी तुमसे
तुम बस धैर्य रख
इसे बहलाए फुसलाए रखना

खुद-ब-खुद घुल जायेगी
रिश्तो मे प्यार की मिठास
तुम बस इन होठो पर
मीठी सी मुस्कान सजाए रखना

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 खुद-ब-खुद मिट जायेगा
है जो नफरतो का अंधेरा
तुम बस मन की दहलीज पर
स्नेह का एक दीप जलाए रखना

खुद-ब-खुद आ जाएँगी
तुम्हारी जिंदगी मे भी खुशियाँ
तुम बस नेकी और इंसानियत की
रोशनी हर तरफ फैलाए रखना।

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खुद-ब-खुद आ जाएँगी जिंदगी मे भी खुशियाँ-एक कविता
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