कोई दूजा हिन्दुस्तान नही-एक कविता

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कोई दूजा हिन्दुस्तान नही

वो बहक गये बहकाने से
िन्हे मजहब की पहचान नही
वो क्या समझेंगे क्या है अमन
जिन्हे  गीता कुरान का ज्ञान नही

बहती हो जहाँ लहु की नदिया
अमन की जहाँ अजान नही
होगा मुल्क तुम्हारा ऐसा
मेरा हिन्दुस्तान नही

वो क्या जानेंगे मानवता
सीने मे जिनके ईमान नही
जिसकी कोख से जनम लिया
उस माँ का ही सम्मान नही

छल से जो सर धड़ से उड़ा दे
हैवान है वो इंसान नही
होगा मुल्क तुम्हारा ऐसा
मेरा हिन्दुस्तान नही

वो क्या समझेंगे क्या है मोहब्बत
जिन्हे मर्यादा का ध्यान नही
डिगा सके जो हौसले हमारे
सुन लो  ये आसान नही

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झुका सके जो मेरा तिरंगा
ऐसा कोई तूफान नही
बहती है जहाँ प्रेम की गंगा
थकती करके यशोगान नही

जहाँ मने प्रेम से ईद दीवाली
नफ़रत का नामोनिशान नही
इकलौता है सारे जहाँ मे
कोई दूजा हिन्दुस्तान नही

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कोई दूजा हिन्दुस्तान नही-एक कविता
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