वक्त ने फिर वो दौर लौटाया ही नही-एक कविता

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ऐसा कोई भी पल गुजारा नही
िस पल वो पल याद आया नही

यूँ तो धूप भी है खिली लेकिन
दूर तलक कोई साया नही

एक शहर बसाया था तब हमने यारो
फिर कोई और शहर हमे भाया नही

हर शाम का  था जो अनोखा किस्सा
फिर दूजा किस्सा कभी बन पाया नही

हर सुबह एक कहानी कहती  है
जिसे मैं पूरा कभी सुन पाया नही

बैठते थे कभी जो चाय के प्याले संग
वो लम्हे ये दिल भूल पाया नही

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ले गयी जिंदगी छीनकर वो मुस्कानें
वक्त ने फिर वो दौर लौटाया ही नही­

यूँ तो आँख हर कभी नम हो लेती है
एक अरसा हुआ मैं जोर से मुस्कुराया नही ।

ऐसा कोई भी पल गुजारा नही
जिस पल वो पल याद आया नही

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वक्त ने फिर वो दौर लौटाया ही नही-एक कविता
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