वोडाफोन आइडिया प्राइवेट या सरकारी ?

यूं तो एनडीए की सरकार सार्वजनिक कंपनियों को प्राइवेट हाथों में सौंपने के लिए जानी जाती है, जिनमें से कुछ प्रमुख कंपनियों का नाम निम्नवत है.

– शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया,

– बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड.

– हिंदुस्तान प्रीफैबलिमिटेड (HPL),

– इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स इंडिया लिमिटेड,

– भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन- कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CONCOR)

– एनएमडीसी का नागरनकर स्टील प्लांट,

– टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड (THDCIL)

– इंडियन मेडिसीन ऐंड फार्मास्यूटिकल्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (IMPCL),

– कर्नाटक एंटीबायोटिक्स,-इंडियन टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (ITDC) की कई ईकाइयां

– नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (NEEPCO)- प्रोजेक्ट ऐंड डेवलपमेंट इंडिया लि.

– कामरजार पोर्ट- पवन हंस लिमिटेड,- एचएलएल लाइफकेयर,- हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स लि.,

– ब्रिज ऐंड रूफ कंपनी इंडिया लि,- हिंदुस्तान न्यूज प्रिंट लि.,- भारत पंप्स ऐंड कम्प्रेसर्स लि,

– सीमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लि.,

– सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लि,

– भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड,- फेरो स्क्रैप निगम

– स्कूटर्स इंडिया लि.

किंतु आपको भी यह सुनकर हैरानी हुई होगी कि वोडाफोन आइडिया प्राइवेट या सरकारी ? आए दिन यह बहुत ही चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या वोडाफोन आइडिया कंपनी सरकारी होगी या जैसी है वैसी ही प्राइवेट रहेगी.

क्या वोडाफोन कंपनी सरकारी है या प्राइवेट ?

इससे पहले हम आपको यह बताना चाहते हैं कि कोई भी कंपनी सरकारी है या प्राइवेट यह कैसे निर्धारित किया जाता है.

कोई भी कंपनी सरकारी या प्राइवेट ?

जानकारी के लिए बता दूं कि सी कंपनी में सरकार की इक्विटी 50% से अधिक हो तो वह कंपनी सरकारी या सार्वजनिक कहलाती है ठीक इसके विपरीत यदि किसी कंपनी में सरकार की इक्विटी 50% से कम हो अर्थात 50% से अधिक की इक्विटी सरकार के अलावा किसी अन्य व्यक्ति या व्यक्ति समूह के पास हो तो वह कंपनी सरकारी नहीं अपितु प्राइवेट कंपनी कहलाती है अब हम यह जानते हैं कि क्या होती है इक्विटी

इक्विटी क्या होती है ?

आपको शेयर मार्केट में थोड़ा भी इंटरेस्ट हो तो आप भी कई बार इक्विटी शब्द को सुनते होंगे पर आज कब सरल शब्दों में समझाने वाला हूं कि इक्विटी क्या होती है? यदि सरलतम भाषा में कहीं जाए तो इक्विटी का अर्थ किसी कंपनी में आपका शेयर या आपकी ओनरशिप से होती है. अर्थात किसी कंपनी में आपने कितना प्रतिशत इन्वेस्ट किया.

चलिए एक उदाहरण से समझते हैं

यदि आप किसी कंपनी की शुरुआत करते हैं और उस कंपनी को स्थापित करने के लिए कुल लागत मूल्य 1000 करोड़ रुपये हैं किंतु आपके पास फिलहाल 800 करोड़ रुपये ही हैं तो आप किसी ना किसी तरह से 200 करोड़ रुपये को जमा करने की कोशिश करेंगे आपके पास कई रास्ते होते हैं आप बैंक से कर्ज ले सकते हैं या फिर आप किसी पार्टनर को साथ रखकर काम कर सकते हैं.

आप बैंक से कर्ज ना लेकर किसी पार्टनर के साथ काम करना अधिक पसंद करते हैं तो उस पार्टनर को भी 200 करोड़ रुपये आपकी कंपनी में इन्वेस्ट करना होगा तभी तो कंपनी इस्टैबलिश्ड की जा सकती है. इस स्थिति में कंपनी को इस्टैबलिश्ड करने के लिए आपने 80% रुपया का इन्वेस्ट किया जबकि आपका पार्टनर 20% रुपया का इन्वेस्ट किया. इस प्रकार हम कह सकते हैं कि कंपनी में आपकी इक्विटी 80% जबकि पार्टनर की इक्विटी 20% है.कंपनी में आप की हिस्सेदारी 80% जबकि पार्टनर की हिस्सेदारी 20% हुई.सामान्यतया इक्विटी को यूं समझे तो कुल एसेट्स में लायबिलिटी को निकाल दिया जाए तो इक्विटी ही बचती है।

वोडाफोन आइडिया सरकारी या प्राइवेट ?

यदि मैं तथ्यात्मक बात करूं तो वोडाफोन आइडिया कंपनी में भारत सरकार की इक्विटी 35.8% है अर्थात सरकार की हिस्सेदारी 35.8% है. जो कि 50% से कम है और हम पहले ही जान चुके हैं कि कंपनी सरकारी तभी कहलाएगी जब उस कंपनी में सरकार की इक्विटी 50% से अधिक हो अर्थात हम कह सकते हैं कि वोडाफोन आइडिया कंपनी सरकारी नहीं अपितु प्राइवेट कंपनी ही रहेगी।

बिजनेस इनसाइडर इंडिया: एजीआर (समायोजित सकल राजस्व) मामले की समयरेखा

– 1994 – राष्ट्रीय दूरसंचार नीति की घोषणा की। दूरसंचार कंपनियों को एक निश्चित भुगतान करने की उम्मीद है(हर साल लाइसेंस शुल्क) ।

1999-टेलीकॉम कंपनियां भुगतान करने में विफल रहती हैं, उनके एजीआर का एक प्रतिशत भुगतान करने के लिए सहमत होती हैं।

2003 – कुछ दूरसंचार कंपनियां दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलीय न्यायाधिकरण को एजीआर परिभाषा पर सवाल उठाती हैं।

अक्टूबर 2019 -सरकार के पक्ष में एससी नियम। फैसले के लिए टेलीकॉम कंपनियों को 1.56 लाख करोड़ रुपये से अधिक के स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क के अलावा एजीआर बकाया का भुगतान करना होगा।

नवंबर 2019 -टेल्कोस ने अपने अक्टूबर एजीआर फैसले की समीक्षा की मांग की।

जनवरी 2020 -टेल्कोस 23 जनवरी को भुगतान की समय सीमा से चूक गए, सरकार ने SC से उनके खिलाफ जबरदस्ती कार्रवाई नहीं करने को कहा।

फरवरी-मार्च 2020 – टेलीकॉम कंपनियों ने एजीआर बकाया का आंशिक भुगतान शुरू किया।

जून 2020 -सुप्रीम कोर्ट ने वोडाफोन-आइडिया को 53,000 करोड़ रुपये खर्च करने का आदेश दिया। वोडाफोन-आइडिया ने भुगतान के लिए 20 साल की समयसीमा मांगी है।

जुलाई 2020 -एससी कोर्ट का कहना है कि एजीआर बकाया की गणना अंतिम है, रुपये की मांग की पुष्टि करता है। 1.56 लाख करोड़।

अगस्त 2020 -सुनवाई खत्म, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

सितंबर1 2020 -सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि दूरसंचार कंपनियां 10 साल में एजीआर बकाया का भुगतान करेंगी।

अब हम जानते हैं कि ए जी आर (AGR) क्या होता है ?

ए जी आर (यानी एडजेस्टेड ग्रॉस रिवेन्यू) का शाब्दिक अर्थ “समायोजित सकल राजस्व” होता है. AGR एक ऐसी संस्था है जो विभिन्न टेलीकॉम कंपनियों से राजस्व वसूल करती है। इसमें बकाया धन का मूलधन ब्याज को भी जोड़ा जाता है। क्यों मिली भारत सरकार को वोडाफोन आइडिया कंपनी में 35.8% की हिस्सेदार?? वोडाफोन आइडिया कंपनी के यहां बकाया राशियों में केवल ब्याज का मूल्य ही लगभग 16 हजार करोड़ रुपये होते हैं। और इसी 16 हजार करोड़ रुपया के बदले सरकार को वोडाफोन आइडिया कंपनी में 35.8% की हिस्सेदारी मिली है बाकी का मूलधन कंपनी को 10 साल के भीतर भीतर चुकाने होंगे ऐसा सुप्रीम कोर्ट का आदेश है।

अब हम यह देखेंगे कि वोडाफोन आइडिया कंपनी में किसका किसका शेयर कितना है?

इस कंपनी में भारत सरकार की हिस्सेदारी सबसे अधिक 35.8% और फिर दूसरे नंबर पर वोडाफोन कंपनी के पास 28.5% जबकि बिरला ग्रुप यानी आइडिया के पास 17.8% स्टेट रहेगा.

निष्कर्ष:

वोडाफोन आइडिया टेलीकॉम कंपनी मैं भारत सरकार की भागीदारी सर्वाधिक(35.8%) होते हुए भी 50 फ़ीसदी से कम होने के कारण इस कंपनी को फिलहाल सरकारी नहीं कही जा सकती इसीलिए डिसीजन मेकिंग पावर भी सरकार के पास नहीं रहेगी।


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